नहीं आख़िरी ये पैगाम मेरा...

नहीं आख़िरी ये पैगाम मेरा,
पी लिया आज जो  मैंने,
नहीं आख़िरी ये जाम मेरा,
अब तो यूँ ही नहाया करेंगे
 हम अपने चहेतों के संग,
मुहब्बत के फुहारों  में
  
 ये तो बस झलक भर है
हमारी चाहत की
नहीं आख़िरी ये शाम मेरा,
हम खिदमत करते रहेंगे
आपकी दिलोजान से.
यकीं कर हमारा,
नहीं आख़िरी ये सलाम मेरा
.

हैप्पी मदर्स डे...........





ऐसे ही हजारों रंग आपके जीवन में हम डालते रहेंगे हमारा वादा है, बस आप हमारे साथ जुड़े रहिये! आपके जीवन के कैसे भी पल हों, कैसे भी अनुभव हों, हमारे साथ शेयर कीजिये... हम आपके साथ अपनी रचनाओं के माध्यम से निभाते रहेंगे.. आपको नई नई शायरी चाहिए. नई गजलें चाहिए, नए गीत चाहिए.. आप अपने हालत ऐ बयान हमसे कीजिये, हम आपके  साथ हैं..

3 टिप्‍पणियां:

संजय भास्कर ने कहा…

वाह ! जी,
इस कविता का तो जवाब नहीं !

संजय भास्कर ने कहा…

कृपया वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें ...टिप्पणीकर्ता को सरलता होगी ...
वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो NO करें ..सेव करें ..बस हो गया .

Anil Avtaar ने कहा…

Sanjay Ji.. aap pah;i bar hamare blog par aaye.. badi shubhkamnayein di.. bahut-bahut dhanyawaad.. blog par aate rahiyega aur jaroori salah dete rahiyega..