मैं ही मैं हूँ...

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मनमौजी हूँ मैं, 
लकीरें खींचने की कोशिश 
रही है पानी में भी 
कभी दीखता हूँ मासूम बच्चे सा 
कभी बूढ़ा, भरी जवानी में भी 

चौंकता हूँ 
मैं क्या हूँ, खुद से जो 
कभी पूछता हूँ 
हंस देता हूँ कभी किसी माहौल में 
कभी किसी के गम में भी
रोता हूँ 

देखता हूँ जो सड़कों पर 
मजबूर सारे.. 
मुझ सा ही दिखाई देते हैं सभी 
जब सब की भीड़ में खुद को 
खोजता हूँ.. 

ये अनिल.. वो अनिल.. 
कभी राजा..
कभी भिखारी की आत्मा में शामिल
कभी मुसाफिर कभी मंजिल 
कभी मझधार तो कभी साहिल 

कैसे तकलीफ दूँ किसी को 
जब रोना मुझे ही है 
कैसे चुरा लूँ चैन 
किसी की हानि कर बैठूं 
जब कुछ न कुछ खोना मुझे ही है.. 

दीखता हैं मुझे तुम में भी अक्स मैं की
ऐसा नहीं की सिर्फ बोलता हूँ..



19 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

कैसे तकलीफ दूँ किसी को
जब रोना मुझे ही है
कैसे चुरा लूँ चैन
किसी की हानि कर बैठूं
जब कुछ न कुछ खोना मुझे ही है.. bahut khoob

Dr Varsha Singh ने कहा…

ये अनिल.. वो अनिल..
कभी राजा..
कभी भिखारी की आत्मा में शामिल
कभी मुसाफिर कभी मंजिल

मन को गहरे तक छू गई एक-एक पंक्ति...एक-एक शब्द....सार्थक रचना....बधाई...

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

वाह अनिल जी,
बहुत सुन्दर, भावोत्प्रेरक रचना रची है आपने....
सादर बधाई...

amrendra "amar" ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव एवं शब्द संयोजन ....लाजबाब ..

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

देखता हूँ जो सड़कों पर
मजबूर सारे..
मुझ सा ही दिखाई देते हैं सभी
जब सब की भीड़ में खुद को
खोजता हूँ..

awesome

mridula pradhan ने कहा…

bahut achcha likhe hain......

वर्ज्य नारी स्वर ने कहा…

लाजवाब रचना

Sunil Kumar ने कहा…

बहुत सुन्दर, बधाई......

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

भावपूर्ण रचना....
सियाराम मय सब जग जानी | करौं प्रनाम जोरि जुग पानी

इमरान अंसारी ने कहा…

कैसे तकलीफ दूँ किसी को
जब रोना मुझे ही है
कैसे चुरा लूँ चैन
किसी की हानि कर बैठूं
जब कुछ न कुछ खोना मुझे ही है..


बहुत खूबसूरत अहसास समेटे पोस्ट.........लाजवाब |

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

कभी राजा..
कभी भिखारी की आत्मा में शामिल
कभी मुसाफिर कभी मंजिल

Khoob.... Behtreen Panktiyan

Kunwar Kusumesh ने कहा…

बहुत सुन्दर.

Amrita Tanmay ने कहा…

विराट स्वरूप सी रचना..एकोहम बहुस्यामि

अनुपमा पाठक ने कहा…

सुन्दर...!
नवरात्रि की शुभकामनाएं!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

आत्म चिंतन से उपजी रचना ... गहरी सोच ...
विजय दशमी की मंगल कामनाएं ...

हास्य-व्यंग्य का रंग गोपाल तिवारी के संग ने कहा…

Achhi kavita. vijay dashmi ki hardik subhkamna.

Dr Varsha Singh ने कहा…

विजयादशमी पर आपको सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं।

B.S .Gurjar ने कहा…

कैसे तकलीफ दूँ किसी को
जब रोना मुझे ही है
कैसे चुरा लूँ चैन
किसी की हानि कर बैठूं
जब कुछ न कुछ खोना मुझे ही है.....bahut sundar rachana ..anil jee.abhar ....

Anil Kumar ने कहा…

Shukriya..