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वो कुछ हसीन पल
जज्बातों से भरे कोमल
मार देता ठोकरें
कोमल उन पलों को भी
गर होती खबर,
उन पलों को आना दुबारा न था
अब जा रहे हैं दूर उनसे
पहले थे मायूस मगर अब,
नाराज हम
नसीहत है न आवाज दें हमें
ना करीं झूठी वकालत खुद की
कि उनके हाथों में आया
वक्त का सितारा न था
हमें तो शक है उस फरेबी पर
कहीं वो बेहिचक .....
ये न कह दें,
वो इंतिजार कर रहे थे, मगर
हमने उन्हें पुकारा न था ..!
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