तमन्ना एक अधूरी सही..!



मुझे पहचान न सकें वो.. 
आम ज़माने सा - समझ लिया मुझे भी 
खैर, देर ही सही,
शुक्र है - बख्श दिया.. 
उनकी समझ अधूरी सही..! 

तोड़ दिया मेरी गफलत को.. 
टूटा आईना दिखाया हमें.. 
टुकड़ों में ही सही, 
हमने पहचान लिया खुद को.. 

होना था कभी - अभी से वो दूरी सही..!

जिंदगी की 
सबसे बड़ी भूल हैं वो.. 
उम्मीद की हमने
फिर भी अपने उसूलों के खिलाफ..
माना ये मजबूरी सही.!

खुद को संभाला करेंगे..
फकीरों की तरह उनसे,
अब न कुछ भी माँगा करेंगे..
है मुश्किल मगर, कर लेंगे सब्र
अपनी तमन्नाओं से..
मेरी अधूरी जिंदगी की
तमन्ना एक अधूरी सही..!

7 टिप्‍पणियां:

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

tamanna jald poori ho...aamen

Yashwant Yash ने कहा…

कल 09/01/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद!

Anil Kumar ने कहा…

शुक्रिया सुरेन्द्र सर ......!

Anil Kumar ने कहा…

शुक्रिया यशवंत सर .....!

Kaushal Lal ने कहा…

सुंदर अभिव्यक्ति ....

Digamber Naswa ने कहा…

तमन्नाएं खुद ही पूरी करनी होती हैं ...
अच्छी अभिव्यक्ति है ...

savan kumar ने कहा…

सुंदर रचना -----आभार