भोजपुरी गीत : जो किसी एल्बम के लिए मैंने लिखे....

तोहरे में देखत रहनी, जिनगी के प्यार हो..2
काहे नेहिया तोड़ दिहलू कएलू किनार हो..-२

दिन रात सपना में तोहरे के देखत  रहनी
सुख चाहे दुःख हो 
तोहरे के जोहत रहनी..

तोहरे में खोजत रहनी ख़ुशी दुई चार हो 
कहे नेहिया तोड़ दिहलू कएलू किनार हो...2

का कहीं जिनगी केतना भरी बुझाला
तू हीं याद बाड़ू 
औरु कुछु न सुझाला

तोहरे बिना एक्को पल बुझाला पहाड़ हो
काहे नेहिया तोड़ दिहलू कएलू किनार हो...2

आस रहे  तोहरे संगे बीती उमरिया
हो जाइत जिनगी आपन  
सौंसे इन्जोरिया 

मांगत रहीं प्रीत के ज्योति कैलू अन्हार हो..
कहे नहया तोड़ देहालू कएलू किनार हो...२

तोहरे में देखत रहनी, जिनगी के प्यार हो..2
काहे नेहिया तोड़ दिहलू कएलू किनार हो..-२

5 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

achha laga

Anil Avtaar ने कहा…

meri haunsala aafjai ke liye tahe dil se dhanyawaad.. aapki rachanaon ki tarah meri rachna bhi ban paye.. bas isi tarah apne comments aur salah dalte rahiye plz...

Amrita Tanmay ने कहा…

सहरसा में तो मैथिलि बोली जाती है....भोजपुरी में भी बहुत अच्छा लिखा है..

Anil Avtaar ने कहा…

Bahut-bahut dhanyawaad Amrita Ji..
Bhasah to ek madhyam hai.. bas samvedana honi chahiye.. aap hamre blog par aayin mera haunsala badhaya, bahut-bahut dhanyawaad..

Prakash Jain ने कहा…

bhojpuriya mein raura geet padhni, badhiya likhle bani...:-)