न तो शिकवा.....

न तो शिकवा, न शिकायत ही ,
न तकरार करने को  जी चाहता है,
अब तो सिर्फ उन्हें
नजरों के सामने बिठाकर
 अपनी आँखों को उनकी आँखों से,
दो चार करने को जी चाहता है.
चाहत में न  कमी थी मेरी मगर
देर उन्होंने की अक्सर
कोई गम नहीं अब
बीती बातों पर न
तकरार  करने को जी चाहता है
बेशक अधुरा प्यार हमारा,
मगर चाहे जिस जनम मिले वो दुबारा,
 बेपलक उस जनम तक
उनका इंतिजार करने को जी चाहता है.
गफलतों की अब जगह नहीं
भूलकर सारे शिकवे एक
बार उनपे इख़्तियार करने को जी चाहता है..

3 टिप्‍पणियां:

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है

संजय भास्कर ने कहा…

वाह पहली बार पढ़ा आपको बहुत अच्छा लगा.

Anil Avtaar ने कहा…

Bhaskar Ji, dhanyawaad jo aap hamare blog par aaye, hausala badhaya.. dhanyawaad..